सर्दियों की दस्तक के साथ ही भारत के कई हिस्सों में एक अजीब और डरावनी समस्या उभर कर सामने आई है। आमतौर पर हम मानते हैं कि सांप मानसून यानी बारिश के मौसम में ज्यादा निकलते हैं, लेकिन असलियत कुछ और है। वन विभाग के विशेषज्ञों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कड़ाके की ठंड के कारण कोल्ड-ब्लडेड (शीत-रक्त वाले) सरीसृप अब गर्मी की तलाश में इंसानी बस्तियों और घरों की ओर रुख कर रहे हैं। यह स्थिति खासकर उन इलाकों में खतरनाक हो गई है जहाँ तापमान में अचानक गिरावट आई है।
बात सिर्फ डर की नहीं है, बल्कि यह इन जीवों के जीवित रहने की जद्दोजहद है। चूंकि सांप अपने शरीर का तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर सकते, इसलिए वे धूप वाली जगहों, छतों और यहां तक कि आपके जूतों में भी शरण ले सकते हैं। अगर आप सावधानी नहीं बरतते, तो एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।
पायथन और रसेल वाइपर: ठंड में बदल जाता है इनका व्यवहार
सर्दियों में सांपों की सक्रियता को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि वे ऐसा करते क्यों हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अजगर यानी पायथन जैसे बड़े सांप शीतनिद्रा (hibernation) में जाने से पहले अपने शरीर को गर्म करने के लिए घंटों धूप सेंकते हैं।
अजीब बात यह है कि मानसून में जहाँ सांप खेतों और नालियों के पास मिलते हैं, वहीं सर्दियों में वे सड़क किनारे, खेतों की मेड़ों और घरों की छतों पर धूप सेंकते हुए पाए जाते हैं। हालांकि पायथन जहरीले नहीं होते, लेकिन वे बेहद शक्तिशाली शिकारी होते हैं। ये अक्सर पालतू कुत्तों, बकरियों और मुर्गियों पर हमला कर देते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पशुधन का नुकसान हो रहा है।
वसई-विरार में 'घोन' का आतंक: सिर्फ 3 दिन में 5 हमले
मुंबई से सटे वसई-विरार शहर में हाल ही में एक चिंताजनक घटनाक्रम देखने को मिला। नवंबर की शुरुआत में जब इलाके में कड़ाके की ठंड पड़ी, तो महज तीन दिनों के भीतर शहर के अलग-अलग इलाकों में पांच जहरीले सांप पाए गए। इनमें सबसे ज्यादा खतरा 'घोन' यानी रसेल वाइपर का था।
सांप विशेषज्ञ हेमंत पवार ने स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि सितंबर-अक्टूबर में हुई बेमौसम बारिश और उसके तुरंत बाद आई ठंड ने इन सांपों को उकसाया है। दरअसल, सर्दियों का समय रसेल वाइपर के लिए प्रजनन (breeding) का मौसम होता है, जिसके कारण वे ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं।
रसेल वाइपर की जानलेवा रफ्तार
रसेल वाइपर, जिसे स्थानीय स्तर पर सोन्या-पाराड, कंबला या जुगिरा जैसे नामों से जाना जाता है, भारत के चार सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसकी सबसे डरावनी बात इसकी रफ्तार है। यह सांप 8 फीट प्रति सेकंड की गति से हमला कर सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर आप इससे दो फीट की दूरी पर हैं, तो यह मात्र 0.25 सेकंड में आपको डस सकता है। इतनी तेजी के कारण खुद को बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। वसई-विरार के गिरजा, वसलाई, मंडले और मर्सिस इलाकों में हाल ही में 3 से 5 फीट लंबे वाइपर देखे गए हैं।
सावधानी ही बचाव है: विशेषज्ञों की सलाह
जब खतरा आपके दरवाजे तक आ जाए, तो घबराने के बजाय सही कदम उठाना जरूरी है। वन विभाग के विशेषज्ञों ने कुछ बुनियादी सावधानियां बताई हैं जो आपकी जान बचा सकती हैं:
- जूतों की जांच: सुबह उठकर जूते या सैंडल पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह झाड़ लें, क्योंकि सांप अक्सर इनमें छिप जाते हैं।
- सुरक्षात्मक गियर: खेतों में काम करते समय या रात में बाहर निकलते समय मोटे गमबूट्स (Gumboots) पहनें।
- घर की सफाई: घर के कोनों में जमा कबाड़ या अवरोधों को हटा दें, क्योंकि सांप अंधेरी और सुरक्षित जगहों को ढूंढते हैं।
- सीधा मुकाबला न करें: अगर आपको कोई सांप दिखे, तो उसे मारने या भगाने की कोशिश बिल्कुल न करें। यह खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप दिखने पर तुरंत स्थानीय वन अधिकारियों या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम से संपर्क करना चाहिए। वे इन जीवों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देते हैं, जिससे इंसान और जानवर दोनों सुरक्षित रहते हैं।
जलवायु परिवर्तन: माउंट एवरेस्ट तक पहुंचे जहरीले सांप
अब बात एक बड़े और वैश्विक खतरे की। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से सांपों का भौगोलिक दायरा बदल रहा है। वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अब वे इलाके भी सुरक्षित नहीं रहे जो कभी अत्यधिक ठंडे थे।
हैरानी की बात है कि माउंट एवरेस्ट के पास के क्षेत्रों में 10 जहरीले सांप पाए गए, जिनमें 9 किंग कोबरा और 1 मोनोकल्ड कोबरा शामिल थे। काठमांडू और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में इन सांपों की मौजूदगी ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है।
शोध बताते हैं कि इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान सालाना औसतन 0.05 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा है। इसी मामूली बढ़ोतरी ने इन जहरीले सांपों के लिए वहां जीवित रहना और पलायन करना संभव कर दिया है। यह इस बात का संकेत है कि ग्लोबल वार्मिंग न केवल ग्लेशियर पिघला रही है, बल्कि खतरनाक वन्यजीवों को नए और अनजाने इलाकों में धकेल रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सर्दियों में सांप इंसानी बस्तियों की ओर क्यों आते हैं?
सांप 'कोल्ड-ब्लडेड' जीव होते हैं, जिसका मतलब है कि वे अपने शरीर का तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर सकते। सर्दियों में जीवित रहने और अपनी ऊर्जा बनाए रखने के लिए उन्हें बाहरी गर्मी की जरूरत होती है। इसलिए, वे धूप वाली छतों, गर्म दीवारों और इंसानी घरों जैसे स्थानों की तलाश करते हैं जहाँ तापमान बाहर की तुलना में थोड़ा अधिक होता है।
रसेल वाइपर (घोन) अन्य सांपों से कैसे अलग और खतरनाक है?
रसेल वाइपर अपनी अविश्वसनीय हमला करने की गति के लिए जाना जाता है। यह 8 फीट प्रति सेकंड की रफ्तार से हमला करता है, जिससे व्यक्ति को प्रतिक्रिया करने का समय ही नहीं मिलता। यह भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक है और इसका डंक घातक हो सकता है। यह मुख्य रूप से घास के मैदानों और चूहों के बिलों में रहता है।
अगर घर में सांप दिख जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?
सबसे पहले सांप से सुरक्षित दूरी बना लें और उसे उकसाएं नहीं। उसे मारने या पकड़ने की कोशिश करना सबसे बड़ी गलती होती है क्योंकि डरकर सांप हमला कर सकता है। तुरंत वन विभाग की स्नेक रेस्क्यू टीम या किसी प्रशिक्षित वन्यजीव विशेषज्ञ को फोन करें। तब तक सांप पर नजर रखें ताकि रेस्क्यू टीम उसे आसानी से ढूंढ सके।
क्या जलवायु परिवर्तन वास्तव में सांपों के रहने की जगह बदल रहा है?
हाँ, वैज्ञानिकों ने पाया है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण सांप अब उन ठंडे इलाकों में भी पहुंच रहे हैं जहाँ वे पहले कभी नहीं देखे गए। उदाहरण के लिए, माउंट एवरेस्ट और काठमांडू के पास किंग कोबरा का पाया जाना इस बात का प्रमाण है। तापमान में होने वाली मामूली वृद्धि भी इन सरीसृपों को नए क्षेत्रों में बसने में मदद कर रही है।
सर्दियों में सांप के हमलों से बचने के लिए सबसे प्रभावी उपाय क्या है?
सबसे प्रभावी उपाय सतर्कता और स्वच्छता है। अपने जूते पहनने से पहले उन्हें चेक करना, रात में टॉर्च का इस्तेमाल करना और घर के आसपास झाड़ियों या कबाड़ को हटाना बहुत जरूरी है। साथ ही, खेतों में काम करने वाले लोगों को गमबूट्स पहनने की सख्त सलाह दी जाती है ताकि सीधा संपर्क न हो।